शम्अे – एहसास को ज़ुल्मात में जलने देना – ग़ज़ल – ओबैद आज़म आज़मी

सूरज को निकलने देना   शम्अे – एहसास को ज़ुल्मात  में जलने देना मार्का टलने के लाएक़ हो तो टलने देना इक निज़ाम ऐसा मुरत्तब करें फ़र्दा  के लिए जिसका…

सफ़र आसान तो होगा मगर जाना नहीं अच्छा – ग़ज़ल – ओबैद आज़म आज़मी

ग़ज़ल – ओबैद आज़म आज़मी सफ़र आसान तो होगा मगर जाना नहीं अच्छा हवा ले जाये जिस जानिब उधर जाना नहीं अच्छा बहुत सी मंज़िलें…

उर्दू की पहचान हैं हम पहचान हमारी उर्दू है– ओबैद आज़म आज़मी

जान हमारी उर्दू है – ओबैद आज़म आज़मी साथ रही है साथ रहेगी जान हमारी उर्दू है उर्दू की पहचान हैं हम पहचान हमारी उर्दू…